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गजल- आग चूल्ही के अब जराई के: सभै दढ़ियार बा मोटान बाटै, आग चूल्ही के अब जराई के। वदन उघार बा फटही धोती, लाज धनिया के अब बचाई के। सभै सामिल बा चापलूसी मा, खरी बतिया भला सुनाई के। हेराइ मोर कहूँ गा कजरी चइता राग भिनसारे वाला गाई के। हुनर उछिन्न गाँव से होइ गा बेना मउनी बुनै सिखाई के। छोटका परिवार बस मेहरी लरिका, बोझ बप्पा कै अब उठाई के। बंस कै सान दुलारा बेटवा, बिना बिटिया के बंस लाई के। लोक मरजाद दाँव चौसर कै, इहाँ कान्हा के अब बुलाई के। निहारैं रात दिन दुआर तर आँखी, मोहार माई कै जगमगाई के। गवा परदेस तौ फिर न लउटा करेज पूत कै या केहू कसाई के। - अरुण कु तिवारी

गीत कविता

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भिनसार होइगा.. भिनसार होइगा चिरई चहाय लागीं हो उजियार होइगा भउजी लजाय लागीं हो।। फुनगी पे बोलै कवनो स्यामा चिरइया अँगना बहारै झकझोर पुरवइया सरिया मा गइया रँभाय लागी हो उजियार होइगा.. महुआ चुवै रस भीजी रे बयरिया बड़की मुडेर पीछे अथवै अजोरिया सगरी तरइया कुम्हिलाय लागीं हो, उजियार होइगा.. बाँस बँसवरिया लुकानी अन्हियरिया महकै गुलाब रातरानी फुलवरिया रहिया डगर गमकाय लागीं हो उजियार होइगा.. निदिया के माती धना सोयी रे कोठरिया अल्हरी उमिरिया मा खोयी अभिसरिया होतै भोर देहिया पिराय लागी हो उजियार होइगा.. पलना पे ललना के गूंजी किलकरिया बेटवा खेलावै मारि मारि टिटकोरिया माई माई कय कोखिया जुड़ाय लागी हो उजियार होइगा.. भिनसार होइगा चिरई चहाय लागीं हो उजियार होइगा भउजी लजाय लागीं हो।। - अरुण कु तिवारी